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Sunday, 7 March 2010

छोटी सी आशा

This was actually a short message, converted to a poem...by me ofcouse...
Dedicated to all those people who want to be a kid once again...

दिल चाहता है आज फिर से छोटा बन जाऊं
रोज़ सुबह छुट्टी के बहाने बनाऊं 
और तैयार होने में टाइम लगाऊ
स्कूल की बस छूट जाने पर
पापा को स्कूल ले जाने के लिए मनाऊं

दिल चाहता है आज फिर से छोटा बन जाऊं 
स्कूल अस्सेम्ब्ली में आखें खोल के प्रयेर गाऊं
क्लास में चुपके से तिफ्फिन खोलू
और पकडे जाने पर पेट दर्द का बहाना बनाऊं 

दिल चाहता है आज फिर से छोटा बन जाऊं
दिन भर स्कूल में मस्ती मारूं
और बस में बच्चो पे रोब दिखाऊं

दिल चाहता है आज फिर से छोटा बन जाऊं
सोफे पर कूदू, बाथरूम में ज़ोर-ज़ोर से गाना गाऊं
दिन भर बैठ कर टी.वी. देखू
और होमेवोर्क के टाइम सो जाऊं

दिल चाहता है आज फिर से छोटा बन जाऊं
वो हर दिन मेरा होमेवोर्क अधुरा रह जाए
और मैं कॉपी घर में रह जाने का बहाना बनाऊं

दिल चाहता है आज फिर से छोटा बन जाऊं
हर रोज़ दोस्तों से हो झगडा
हर रोज़ मैं रूठ जाऊं
पर ज़िन्दगी भर साथ निभाने वाला एक दोस्त और बनाऊं

दिल चाहता है आज फिर से छोटा बन जाऊं 

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